750 वेबसाइटों और 90 यूट्यूब चैनल लोगो और 20 सोशल मीडिया खातों पर कार्रवाई करते हुए किया गया प्रतिबंधित

 भारत में फेक न्यूज़ को बढ़ावा देने वाले वेबसाइट एवं यूट्यूब चैनल तथा सोशल साइटों के लिए बन रही है सरकार ने उन्हें प्रतिबंधित कर दीया है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2021 22 के दौरान फेक न्यूज फैलाने वाली उन सभी वेबसाइटों को चिन्हित किया है जिन्होंने सरकार विरोधी गतिविधियों तथा सामाजिक विरोधी कुल 750 वेबसाइटों , 90 यूट्यूब चैनलों और 20 सोशल मीडिया खातों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रतिबंधित किया । राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में ठाकुर ने कहा कि ये कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69 ए के तहत की गई है । मंत्री ने कहा कि सरकार ने फर्जी खबरें फैलाकर और इंटरनेट पर दुष्प्रचार कर देश की संप्रभुता के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है । यह चैनल फर्जी खबरें चलाकर सामाजिक ताने वाने को तोड़ने का काम करते हैं । ठाकुर ने कहा कि कोविड- 19 से संबंधित फर्जी खबरों को फैलने से रोकने के लिए 31 मार्च , 2020 को प्रेस सूचना ब्यूरो ( पीआइबी ) की फैक्ट चेकिंग यूनिट का एक सेल बनाया गया था । इसमें लोग महामारी से संबंधित खबर का सत्यापन कर सकते हैं । इस इकाई ने 34,125 प्रश्नों का जवाब दिया है । ठाकुर ने कहा कि पीआइबी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फर्जी खबरों और 875 पोस्ट का भी राजफाश किया है । भारत सरकार ऐसे किसी भी न्यूज़ चैनल यूट्यूब चैनल एवं वेबसाइटों को किसी प्रकार का संरक्षण देने का काम नहीं करती है अगर कोई व्यक्ति या प्रेस अपनी अभिव्यक्ति की आजादी एवं स्वतंत्रता का गलत उपयोग करते हैं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


भारत में प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए 180 देशों में से 150 वा सन दिया गया है

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक की रिपोर्ट भारत विरोधी है एवं इससे भारत सरकार सहमत नहीं है। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि वह विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में ' रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर्स द्वारा निकाले गए निष्कर्षों से सहमत नहीं है । इसमें 180 देशों में से भारत को 150 वां स्थान दिया है । सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि निष्कर्षों में लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को कोई महत्व नहीं दिया गया । यह कार्यप्रणाली गैर पारदर्शी है । ठाकुर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और आप सदस्य संजय सिंह के अलग - अलग सवालों का जवाब दे रहे थे । भारत भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एवं अभिव्यक्ति की आजादी हर किसी व्यक्ति को दिया गया है किंतु उनका गलत उपयोग उठाए जाने पर सरकार को ठोस कदम उठाना पड़ा है जिस कारण उन्होंने इन चैनलों एवं वेबसाइट पर या प्रतिबंध लगाया है

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानक में सुधार की आवश्यकता

भारत के किसी भी नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं प्रेस की स्वतंत्रता दी गई है जिसका आए दिन समाचार पत्रों एवं कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा गलत उपयोग किया जाता रहा है जिससे बचने के लिए सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत निहित भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है । उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद ( पीसीआइ ) की स्थापना मुख्य रूप से प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और देश में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों में सुधार के लिए की गई है । समाचार एजेंसियों के लिए नए मानक तय होने से समाचार एजेंसियों पर लोगों की विश्वसनीयता कायम हो सकेगी।

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